बकोरिया कांडः सीआईडी को दिए बयान में ग्रामीणों ने कहा, कोई मुठभेड़ नहीं हुआ, जेजेएमपी ने सभी को मारा

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Ranchi, 06 December: आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ में 12 लोगों के मारे जाने की घटना में तत्कालीन डीआईजी हेमंत टोप्पो और एसआई हरीश पाठक का बयान दर्ज करने के बाद सीआईडी ने ग्रामीणों का बयान भी दर्ज कर लिया है. सोमवार को सीआईडी की टीम ने घटनास्थल के आसपास के ग्रामीणों का बयान दर्ज किया. ग्रामीण सूत्रों ने बताया है कि सीआईडी टीम को दिए बयान में कई ग्रामीणों ने साफ कहा है कि आठ जून 2015 की रात कोई मुठभेड़ नहीं हुआ था. ग्रामीणों ने अपने बयान में कहा है कि जेजेएमपी के उग्रवादियों ने सभी को पकड़ कर मार दिया था. बाद में पुलिस ने मुठभेड़ की कहानी बनायी. उल्लेखनीय है कि घटना के वक्त पलामू में पदस्थापित पुलिस के अफसरों ने भी अपने बयान में मुठभेड़ को संदिग्ध माना है.

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डीआईजी हेमंत टोप्पो ने पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बाद में सीआईडी को दिए बयान में साफ कहा है कि आठ जून 2015 की रात वह घटनास्थल के नजदीक से गुजरे थे. लेकिन वहां पर उन्होंने मुठभेड़ होने जैसा कुछ नहीं देखा था. रात के करीब 2.30 बजे डीजीपी डीके पांडेय ने उन्हें फोन किया था. डीजीपी ने उनसे कहा था कि तुम्हारे यहां सतबरवा में मुठभेड़ हुआ है. उन्होंने इस तरह की सूचना होने से इंकार किया था. डीजीपी का फोन आने के बाद उन्होंने (आइपीएस) ने सतबरवा थाना प्रभारी मो. रुस्तम को फोन किया और मुठभेड़ के बारे में पूछा. थाना प्रभारी ने किसी तरह का मुठभेड़ होने की बात से इंकार किया था. डीआइजी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल और लातेहार के तत्कालीन एसपी अजय लिंडा से भी उन्होंने रात में मुठभेड़ के बारे में पूछा था, जिस पर दोनों ने अनभिज्ञता जाहिर किया था. 

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